हरियाणा में Planokuf D सिरप पर बैन डायएथिलीन ग्लाइकाल की मात्रा अधिक मिली, मध्य प्रदेश और राजस्थान में कई बच्चों की हो चुकी मौत
हरियाणा में Planokuf D सिरप पर बैन डायएथिलीन ग्लाइकाल की मात्रा अधिक मिली, मध्य प्रदेश और राजस्थान में कई बच्चों की हो चुकी मौत

Satya Khabar,India
Ban on Planokuf D Syrup हरियाणा सरकार की सजगता से हरियाणा में कई बच्चों की जान बच गई है और कई बच्चे गंभीर रूप से बीमार होने से बच गए हैं। प्रदेश सरकार में तुरंत प्रभाव से प्लेनोकफ डी सिरप पर बैन लगा दिया है। खांसी की इस दवाई में डायएथिलीन ग्लाइकाल की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक मिलने पर स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने दवा की बिक्री और उपयोग रोकने का आदेश जारी कर दिया है।
डायएथिलीन ग्लाइकाल की अधिक मात्रा मानव शरीर के लिए अत्यंत विषैली और घातक सिद्ध हो सकती है। स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों को आह्वान किया कि प्लैनोकफ डी सीरप का उपयोग न करें। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन गुवाहाटी से प्राप्त आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार उक्त सीरप के कुछ बैचों में डायएथिलीन ग्लाइकाल की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है।
इस रासायनिक तत्व से गुर्दों की विफलता और तंत्रिका तंत्र में विकार के साथ ही मृत्यु तक हो सकती है। विशेष रूप से बच्चों में। इस दवा का निर्माण उत्तराखंड के भगवानपुर स्थित रायपुर में मेसर्स श्रेया लाइफसाइंसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जाता है। आरती सिंह राव ने कहा कि जनता की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने इस खतरनाक सीरप के सभी बैचों को तुरंत बाजार से हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही दवा विक्रेताओं, वितरकों, अस्पतालों और डाक्टरों से अनुरोध किया गया है कि वे इस दवा को किसी भी स्थिति में न बेचें, न वितरित करें और न ही उपयोग करें।
क्या है डाइएथिलीन ग्लाइकॉल
हरियाणा ड्रग कंट्रोलर की ओर से जारी दिशा-निर्देश के मुताबिक कफ सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) का रसायन मिलाया जाता है। यह एक रंगहीन और गंधहीन अल्कोहलिक कंपाउंड है, जिसका इस्तेमाल कफ सिरप को मीठा बनाने और घुलनशील बनाने में किया जाता है। इसकी ज्यादा मात्रा बच्चों की किडनी फेल व तंत्रिका संबंधी जटिलताएं होने के साथ मौत भी हो सकती है।
पिछले महीने हो चुकी मौतें
पिछले महीने मध्यप्रदेश व राजस्थान में कफ सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा अधिक पाई गई थी, जिसके कारण कई बच्चों की मौत हो गई थी।